क्या लिखू .क्या गाऊ .....
आरती गाऊ या दुखद कोई गीत सुनाऊ
ग़ज़ल तो बह गई गंगा के संग
जब बिछडा जोड़ा दर्द के संग
मसखरी करू कैसे हज़ारो लाशो के संग
नौटंकी लगती है अब पूजन की विधि
तिलक लगा दू पहले फिर स्नान कराऊ
भूल जाऊ सारी विधियां ...
या फिर ....
उस फौजी को कृष्ण बना
... मीरां सी खुद हो जाऊ ....
जिसने जानबूझ कर भी झोक रखा है खुद को
नर सेवा में , पार उतार रहा सबको वो
जो गए थे मिलने पालनहार को
तू ही बता अब में क्या गाऊ ......
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