(15)
प्यार
कि मंजिल बताओ
सूरतो में ढूंढते हो
मस्त मौला जिंदगी ये
मुफ्त में मिलती नहीं |
(16)
सूरतो में ढूंढते हो
मस्त मौला जिंदगी ये
मुफ्त में मिलती नहीं |
(16)
क्या
बताऊँ,
दिल
लगाओ
इश्क
मोहब्बत को जताओ
हकीकत
में मिल के आओ
ये
ख्वाब में मिलती नहीं....
(17)
सरारत
से,
सराफत
से,
नजाकत
से,
सिखाया
नमी आखों की ताकत से
मगर दिल पत्थर है उसका न पिघले अग्नि, उष्मा, शोलों से
(18)
वो निश्चय कर चुके हैं अब... वो दरिया बन चुके हैं अब,
नहीं रुकना किसी कि आस में उन्हें बस चलते जाना है...
(19)
वो जाये जिस डगर, न हारना तुम
प्यार करना जिंदगी से, जीते रहना
दिल फिर से धडकेगा, मन चहकेगा
सीतारे फिर से गायेंगे, दिल पे छाएंगे.
मगर दिल पत्थर है उसका न पिघले अग्नि, उष्मा, शोलों से
(18)
वो निश्चय कर चुके हैं अब... वो दरिया बन चुके हैं अब,
नहीं रुकना किसी कि आस में उन्हें बस चलते जाना है...
(19)
वो जाये जिस डगर, न हारना तुम
प्यार करना जिंदगी से, जीते रहना
दिल फिर से धडकेगा, मन चहकेगा
सीतारे फिर से गायेंगे, दिल पे छाएंगे.
(20)
आगाज
से अंजाम तक..
एक सहर से शाम तक...
तेरी बिरादरी का नहीं कोई सिक्का यहाँ,
एक सहर से शाम तक...
तेरी बिरादरी का नहीं कोई सिक्का यहाँ,
NICE URS HEART TOCHING YADE . . . . . . I LIKE IT . . .
जवाब देंहटाएंthanks Sanjay Mehra ji
जवाब देंहटाएंआपने लिखा....हमने पढ़ा
जवाब देंहटाएंऔर लोग भी पढ़ें;
इसलिए कल 09/06/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
धन्यवाद!
Yashwant Mathur ji , इस ब्लोग को आपने सम्मान दिया अपनी ब्लोग पोस्ट पर लिंक करने का दिल से आपका बहोत बहोत शुक्रिया
हटाएंबहुत सुन्दर.
जवाब देंहटाएंThanks Nihar Ranjan ji
हटाएंBahut Khub...
जवाब देंहटाएंthanks Mantuji
हटाएंआगाज से अंजाम तक..
जवाब देंहटाएंएक सहर से शाम तक...
तेरी बिरादरी का नहीं कोई सिक्का यहाँ,
इन पंक्तियों ने प्रभावित किया।
aabhar
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