(1)
गम
नहीं .....
कुछ
कसक सी है
आज
पहलु में अजब बेचैनी सी है
कुछ
तो था उस की बातों में .....
क्यों
उस पर होंश गवा बैठे है
(2)
जो
कह लेते तो भी करार आता
...
ये
क्या के होंठो की तुरपन ...
कभी
तोड़ते ही नहीं,
टूटे
तो आराम आये……
(3)
ना
नसीहते दो शेखजी,
नूर
-ए-चमन
आया है
....
नमक
मेरे माथे का ,
उसकी
मेहर से आया है
में
मदहोश हु उसकी बंदगी में,
करू
क्या होश उसी के रहम से आया
है ....
(4)
......आओ
चरागों जलाये खुद को इस
कदर
कसम
खुदा की जल उठे कातिल का
सीना ...
या
कहने दो मुझे या के तुम पैमाने तोड़
दो
या
बहकने दो मुझे ,
या
तनहा मुझे छोड़ दो
(5)
चाँद
के साथ देखिये सितारे अब चमके
दोस्ती के
आँगन में नज़ारे है दमके
वो
जो आये शाम के साए से है ...........
कुछ
वो घबराये से है कुछ ये शरमाये
से है
(6)
सितमगर
बहोत शोर बरपाया तुमने
लो
अहले चमन में आज महफिल है
....
तुम
अपना हुनर आजमाओ
रस्म
-
ओ
-
अदायगी
हम करें
(7)
..
वो
एक पगली कल कह रही थी .........ओह ,
बम
की बारिश
गोल
बारूद ...
एक
रौशनी से तेज़ जेट-यान
और सब तबाह
ये
तुम्हारे महल,
ये
शान-ओ-शोकत
ये तख़्त-ओ ताज, बना
लो
एक
छाता मुहब्बत का वरना भीग
जाओगे अपने ही लहू में
.........
शायद
उसने भोगी थी किसी युद्ध की
त्रासदी .........................
वो
एक पगली कल कह रही थी .........ओह ,
बम
की बारिश ....
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें