जब
रंग आया उसके नूर का
जब
रंग आया उसके नूर का
नूर-ए-चमन
उस हूर का मैं महका
वो
दहका,
बहका
मैं बहक बहक बहका
दामन
मदहोशियों का
थामा
और थम सा गया सीना सागर का
खेल
धडकनों से साँसों का,
मैं
महका
वो
दहका,
बहका
मैं बहक बहक बहका
थमता
न था कारवां तेरी यादों का
थामा
मगर थमता न था वो समुंदर का
सा
गरजता,
लरजता,
बहक
बहक बहका
कब
भूला सितम जलवा-ए-नूर
उस का
कायनात
बना दी उसने कर छलनी
सीना
अपने प्यार का और देखा
उसकी
करिश्मा-ए-कारीगरी
मैं
महका वो दहका,
बहका
मैं बहक बहक बहका .....
आमीन
लेखिका
अनिता
राठी,
लेक्चरार, मानव-विज्ञान/ समाजशास्त्र /इंग्लिश
लिट्रेचर
जयपुर , राजस्थान
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें