शुक्रवार, 28 जून 2013

Aameen...

(42)
.. आओ  ... आज आजमा के देख लो  
मेरी किस्मत के सितारों मुझको 
ये  रोज रोज की कसरतें मंजूर नहीं मुझको 

(43)
ये   जरूरी तो नहीं की 
हर बात पे हामी भर लू 
आ आज कुछ वादे कर लू,
 के तेरी हर बात को अपनी जुबां कर लू 

(44)
शाम को करीने से सजा लो 
भँवरे करे लाख कवायदें 
ध्यान -चश्म में इनको डूबने दो 
शाम को करीने से सजा लो 

कलियों को मुस्कुराने दो 

(45)
दर्द--दिल की ना पूछो दोस्तों कभी ये तेरा  कभी ये मेरा सा लगे है 
हाँ मुहब्बत में गाफिल हर दिल अब मुझे मेरा सा लगे है  ........... 

(46)
है मुहब्बत तो जताते क्यों हो ,  महफ़िलो में  तमाशा बनाते  क्यों हो 
 बहोत गर्जिश है आपके जज्बातों में, यु सरे-आम नुमाइशे  क्यों हो 

(47)
है ये हुनर तेरा या -रब, की ले रहा साँसे दम मेरा भर भर कर  
वरना मुहब्बत का सबब, तो ताज -महल में ढल जाया करता है 

(48)
शीशे की कद्र मयकदो से कहाँ 
कीर कीर कर दिए जाते है पैमाने 
अक्सर, होश खो जाने के बाद ...आमीन 

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