शनिवार, 15 जून 2013

... Yaadein .. जम्मू- Kaashmir ......




घने बादलों के आसमान तले संघन हरियाली के बीच, बस डोडती चली जा रही थी बिलकुल यादों के फिल्मिक शाट दर शाट खुलते पुलंदो की तरहां .............


जम्मू यहाँ की रीत निराली देखि

खूबसूरती की प्राग-माँ देखि,

मेरे शहर की लिपि-पुती सुन्दरी

भ्रम निकाल दे मन से सुन्दरी होने का

ऐसी मिसाल हमने यहाँ देखि

इस शहर से में दोस्ती करू भी तो कैसे,

इसके सीने में धडकते जज्बातों की बात कुछ और है,

इस प्रेम की वादी को किसने बदनाम किया

गुलाब के फूलो से महके बदन

पे बारूद की कालिख को क्यों लगा दिया...

जम्मू यहाँ की रीत निराली देखि ..........

 खूबसूरती की प्राग-माँ देखि,

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