(38)
मंजर-ए- जिंदगानी
बालू की रेत पर एक कहानी
कायनात ख़ुदा की मेहरबानी ...
(39)
डरते
है ऐसे आलम में जिंदगी तुझ से,
आरजुओ
से मांगी इक दुआ हमने
वो
फकीरी-ए-मुहब्बत
में अहसान जता गए ........
(40)
दिलो
की ताबिश एक पल की
औकात
धडकनों की हरकत साँसों की
गुमान
तख्तो-ताज
का,
खाख,
खेला
खेल सब उस एक ही का .....
(41)
इस
इश्क की तासीर क्या कहने ....
इक
तस्वीर जो बसा आये निगाहों
में
क्या
खबर थी दुनिया बस जाएगी
एक निगाह-ए-करम
से,
जो
थी वीरान
कभी वो
बस्ती मेरे ख्वाबो की सवर जाएगी
जन्नतो
की खवाहिश किसे रहमतो की
बरात में .....
आमीन
Hi,
जवाब देंहटाएंwahhh bahut khub....
interesting, Poetry
जवाब देंहटाएंshukriya pawanjit
हटाएंshukriya
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