अनिता की कविता
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सोमवार, 17 जून 2013
चलो तुमको इज़ाज़त है की तुम भूल जाओ मुझे ..... आमीन
ज़माना क्यों गरीब कहता है हमें
हजारो गम की दौलतें है मेरे खजाने में
कोई सौगातें न दो तुम आज
इतना कह दो नहीं भूले दिल से कभी
यूँ भी जिया जा सकता है की उदासियों में सहर हो
चलो तुमको इज़ाज़त है की तुम भूल जाओ मुझे ..... आमीन
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