"कुछ
पल उनके हाथो में तुम रखदो
अपना हाथ जिंदगी "
यूँ
हर वक़्त अपनी ही दास्तान है
जिंदगी
फूलो
का चमन खार समंदर ह जिंदगी
जिंदगी
को अपनी समझ जी लिए अ जिंदगी
अब
तो फकत जिंदगी का घर है जिंदगी
औरो
के सीने में अपनी बना जगह
जिंदगी
दिल
के करीब रहो सब के और फिर तू
जी जिंदगी
बहोत
कह चुकी तू अपनी अपनी जिंदगी
कह
कुछ उसकी जिसकी किसी की गर हुई
हो जिंदगी
कितना
तुझको समझाया रही अनसमझ तू
जिंदगी
वक़्त
किसी का सगा कब हुआ ये समझ
जिंदगी
कुछ
कहने की बात नहीं उनको समझ
जिंदगी
जिन
से अब तुम किनारा कर रही मिल
वक़्त के साथ जिंदगी
कुछ
पल उनके हाथो में तुम रखदो
अपना हाथ जिंदगी
भर
दो करतल ध्वनी मधुर से हो जीवन
राग जिंदगी . .. आमीन
लेखिका
अनिता
राठी,
लेक्चरार,
मानव-विज्ञान/ समाजशास्त्र /इंग्लिश
लिट्रेचर
जयपुर,
राजस्थान
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