.......यादें
याद आती है,..बाते....
बाते
भूल जाती है ......
. क्या कम है ... मीरा ने मोहन के प्रेम को अमर किया अपने भजनों में ....... यहाँ तो मोहन ने मीरा को अमर कर दिया ..... ... नहीं मैं इस
लायक कहाँ ...
यु
मुझमें गुमान नहीं ...
लेकिन
डर है ...
मुझ
में गुमान आ न .जाये
.........
........ अब
और क्या कहूँ ........
आपने
नि:
शब्द कर दिया ...
आपके
ये जज्बात .....
और
ये अपनापन,
......... मैं
तो आभार भी नहीं कह सकती ....
मुझे
लगेगा तिरिस्कार है ये कला
की इस तस्वीर का ......
कौन
उतार पता है,
सच्चा
चित्रांकन ....
वो
भी शब्दों की कूंची में .....
अपनेपन
की रोशनाई भर कर ..........
सच
कहु
आपने मुझे अमर होने का सुख
दिया है .....
क्या
कम है ...
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