शुक्रवार, 7 जून 2013

Aameen


(15)
प्यार कि मंजिल बताओ
सूरतो में ढूंढते हो
मस्त मौला जिंदगी ये
मुफ्त में मिलती नहीं |
(16)
क्या बताऊँ, दिल लगाओ
इश्क मोहब्बत को जताओ
हकीकत में मिल के आओ
 ये ख्वाब में मिलती नहीं....
 (17)
सरारत से, सराफत से, नजाकत से, सिखाया नमी आखों की ताकत से
मगर दिल पत्थर है उसका न पिघले अग्नि, उष्मा, शोलों से
(18)
वो निश्चय कर चुके हैं अब... वो दरिया बन चुके हैं अब,
नहीं रुकना किसी कि आस में उन्हें बस चलते जाना है...
(19)
वो जाये जिस डगर, न हारना तुम
प्यार करना जिंदगी से, जीते रहना
दिल फिर से धडकेगा, मन चहकेगा
सीतारे फिर से गायेंगे, दिल पे छाएंगे.
 (20) 
आगाज से अंजाम तक..
एक सहर से शाम तक...
तेरी बिरादरी का नहीं कोई सिक्का यहाँ,

10 टिप्‍पणियां:

  1. आपने लिखा....हमने पढ़ा
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए कल 09/06/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    धन्यवाद!

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    उत्तर
    1. Yashwant Mathur ji , इस ब्लोग को आपने सम्मान दिया अपनी ब्लोग पोस्ट पर लिंक करने का दिल से आपका बहोत बहोत शुक्रिया

      हटाएं
  2. आगाज से अंजाम तक..
    एक सहर से शाम तक...
    तेरी बिरादरी का नहीं कोई सिक्का यहाँ,

    इन पंक्तियों ने प्रभावित किया।

    जवाब देंहटाएं