सोमवार, 3 जून 2013

yaad-1-यादें याद आती है बातें.. बातें भूल जाती है ...


यादें याद आती है  बातें.. बातें भूल जाती है ...



......... जब तक धडकनों को मालूम न था ... की धड़कन क्या है .. उनकी जरूरत का अहसास नहीं था ... दिल ... तो कुछ और ही शय थी तब, तब तक जब तक दिल को पता चली उसकी हस्ती ... क्या है, ...हाँ ... धडकनों से जुदा, दिल जीव-जंतु विज्ञान का एक मॉडल मात्र ही तो है ... काटो तो खून का जंक्शन .... समझ ले कोई तो धडकनों का साथी , ......फिर तुम .... तुम तो डॉक्टर हो सब समझती हो .... मॉडल भी ... और ... धड़कनो ... की .. धड़कने भी ........ है न .. निशिता .. तुम जानती हो चाँद के साथ आता जाता है यादो का ज्वार भाटा, ठहरता है कुछ पल किनारों पर, और लौट जाता है, ... मेरी निशिता .... बहोत गहरी हो तुम, ..........निशा की तरहा, डरता हु ...... कहीं धडकनों ने धडकनों का साथ न दिया तो ..... दिल ... दिल तो एक मॉडल भर रह जायेगा ........ है न .... निशिता ...




लेखिका 
अनिता राठी,
लेक्चरारमानव-विज्ञानसमाजशास्त्र /इंग्लिश लिट्रेचर 
जयपुर राजस्थान 


6 टिप्‍पणियां:

  1. वाह, अद्भुत प्रेम की अद्भुत पराकाष्ठा.. अनूठे प्रेम की मर्मस्पर्शी बानगी. मानों दिल और धड़कनों का आंलिग्न, मानो पुष्प और भंवरो के मध्यातंर का छुअन..! एक-एक पंक्ति लहू से सींची हुयी सी प्रतीत होती है.. बधाई हो!

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  2. मुझे ब्लॉग बहुत पसंद है और मैं fb पर करीब जो मुझसे जुड़े हैं अन्यथा कोई अच्छे ब्लॉग सामने आते हैं तो पढ़ता हूं और उनसे प्रेरणा लेता हूं बाकी लिख नही पाता।

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