मंगलवार, 4 जून 2013

yaad-4-शादी की शौपिंग का आखिरी सामान ( katran kitab ki ....)


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....कौन जान पता जो उसने जान लिया था, ... बहोत ही  ना समझ  थी  जब तक परिवारवालों ने सगाई कर दी थीशादी की तारीख फिक्स हो गई थी खरीददारी के लिए रोज रोज बाजार जाना,शोर गुल वैसे ही पसंद नहीं था, ... सोचती थी एक ही दिन में सब निबटा लू शादी का सुर्ख जोड़ा,मैचिंग फुटवियरसुहाग श्रृंगार का सामानकोई भी साड़ी एक दूसरी के जैसी न हो रंगक्वालिटी,बनावट .. यहाँ की सिल्क वहां की सिल्कबनारसीकांजीवरमपटोला और न जाने कौन कौन सी.....कैर बहोत अजीब सा मौसम था,  फिर भी हर वक़्तहर हाल में मुस्कुराती वो अपनी धुन में सब काम कर रही थी। ना मालुम क्या था जो उसको बार बार उदास कर जाता सबने सोचा शादी के वक़्त सभी लड़कियां ऐसी ही हो जाती है समझ नहीं पाती खुश होए या दुखी खूब हँसे  या रो ले दहाड़े मार मार कर ... ... नहीं नहीं ऐसा कुछ नहि… उसने चूड़ियाँ लीमैचिंग कीऔर  फूटपाथ पर लगे बाज़ार को देखती  कब छोटी चोपड आ गई पता न चला गर्मी से परेशान हो ,एक प्याऊ पर पानी पिया और सोचा ... बेटा ये मोटे भरी भरी कपडे इनमें तुम गश खाकर गिर पडोगीये साड़ियाँ उफ़ ... सोच कर दम सा घुटने लगा ... फिर सोचा कम से कम जब  शो ख़तम हो जायेगा दूल्हा दुल्हन वाला तब कुछ कम्फर्टेबल पहन लेंगे,  तो कुछ नया ऐसा खरीदे जिसमें सुकून मिले नजर दौड़ी और सामने लाल रंग और सफ़ेद रंग की बारी मल मल के कपडे पर ठहर गई, .... वाह इस से आरामदायक और क्या हो सकता है ..... शादी की तैयारी कर रही हो ये तो ज़रूर ले ही लोदोनों हाथो में शादी का जोड़ाश्रृंगार का सामान चूड़ियाँ सब कुछ लिए आखिरी पड़ाव मान दुकानदार से अंकल ये कपडा क्या भाव दिया ... ये ... आपकी दूकान में दो तीन ही कलर है लेकिन ये कपडा मुझे बहोत भ रहा है ,  दुकानदार उसको एक टक निहारता रहागुरा के बोली ऐसे क्या देखते हो ... बेचना नहीं है क्या,  आलसी कहीं के देखो मेरी बस निकल जाएगी,सामने मेरी बस तैयार खड़ी हैजल्दी से एक लाल मलमल के थान में से .... मेरी ओढनी का कपडा काट के पैक कर दो ..... ये लो पांच सो का नोट जो बनता है काट लो  भी क्या याद करोगे ..मोर मोल भाव नहीं करुँगी .... क्योंकि शादी की शौपिंग का आखिरी सामान आपसे ही ले रही हु न इसी लिए .............. दुकानदार .... व्यापार ....व्यापार होता है बेटी लेकिन तेरे भोलेपन में  एक ऐसी  कह दी ............. हाँ ..... शादी के सामान के साथ साथ .... ये .... आखिरी सामान भी तू ही खरीद ले ना मालूम पराये घर जा कर ये भी नसीब हो न हो .... लड़की ..... की मासूम आँखों में आंसू चालक आयेक्यों  अंकल ...क्या हुआ ...दुकानदार हाथ जोड़ सामने खड़ा था ..... बेबस हु बेटी आज ये सौदा नहीं करूँगा ..... ये कफ़न की दूकान है……… तुम जाओ बस पकड़ो घर जाओ ........ दोनों की आंखो में आंसू .... के  कुछ न था …

लेखिका 
अनिता राठी,  लेक्चरारमानव-विज्ञानसमाजशास्त्र /इंग्लिश लिट्रेचर 
जयपुर राजस्थान 

3 टिप्‍पणियां:

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  2. आखिरी खरीदारी आत्मा पर बोझ हलका हुँआ।

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